यदि पूर्व की कांग्रेस केंद्र शासित सरकार की ग्रामीण क्षेत्रो में लागू योजनाओं का अध्ययन किया जाए तो उसमें हम मुख्यतः कंट्रोल रेट पर मिलने वाली राशन चीनी व मिट्टी के तेल को रख सकते है।
ऐसे उत्तर जमीन से
कटे नेताओं को न केवल निरुत्तर करते है, वरन अपनी अज्ञानता से हंसी के पात्र बनते है । उन्हें क्या मालूम ग्रामीण परिवेश अब कितना बदल गया है ।
यदि अतीत को याद करें तो ग्रामीण जीवन स्तर को ऊपर उठाने में सबसे पहली कड़ी अटल सरकार की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना है।
वर्तमान में मोदी
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्र की योजनाओं की झड़ी लगाकर ग्रामीण जन स्तर को बहुत ऊंचा उठा दिया है।
हर घर गैस , पानी पाइप लाइन , घरों का मालिकाना हक़ , हर घर में टॉयलेट , किसान सम्मान निधि , जन धन खाते , प्रधानमंत्री सड़क योजना से जुड़ते गावं , राज्यों के सहयोग से किसानों को गन्ना मिलों दवरा समय पर भुगतान , ग्रामीण क्षेत्रो में बिजली की समुचित सप्लाई।
इन योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार की उत्पत्ति हुई , उचित बिजली सप्लाई से गांव में फ्रिज व् अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों की बिक्री बढ़ी । जिससे न केवल उद्योंगों ने उन्नति की वरन सरकारों को टैक्स/GST के रूप में अतिरिक्त आय हुई।
प्लम्बर , इलेक्ट्रिसियन , वेल्डर , कारपेंटर , पेंटर , दर्जी , व्हीकल रिपेयर, दुकानों आदि से क्षेत्रीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिलने में सहायता मिली। आदि-आदि
इतना सब होने के
बावजूद अभी भी गांव के रास्ते पर रात के प्रकाश की व्यवस्था न के
बराबर है। केंद्र सरकार को इस दिशा में विशेष पहल करने की आवश्यकता है। केंद्र सरकार इसमें कम्पनी दवरा खर्च
किया जाने वाला फंड CSR आदि का भी सहारा ले सकती है।
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