31.10.26

दिल्ली में Nov.26 से Non-BS-6 वाहन प्रतिबंधित !

दिल्ली  सरकार द्वारा  प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए  1 Nov.26 से दिल्ली में अन्य राज्यों में पंजीकृत ( CNG / इलेक्ट्रिक वाहनों को छोड़कर )  Non-BS-6 से नीचे के वाहनों  प्रबंधित किया गया है। 

  जैसा कि  ज्ञात ही है  कि  उत्तराखंड , उत्तरप्रदेश  रोडवेज  की  सभी बसें अभी  BS-6 नहीं है।  ऐसे में निश्चित ही  दिल्ली  आवागमन के लिए  दीवाली जैसे त्योहरों में यात्रियों की संख्या के हिसाब से  रोडवेज की बसें  कम हो जाएंगी । 

अतः   निवेदन  है  प्रतिबंधित  समय सीमा में  ऐसी  रोडवेज  बसों  को  जो Non-BS-6 से नीचे की है   यात्रियों की सुविधा के  हरिद्वार -रुड़की -मुजफ्फरनगर - मोदीपुरम -मोहनगर -आनंदविहार तक संचालित  किया जाना चाहिए। 

  यात्रियों की सुविधा के लिए मेट्रो सेवा को मोहन नगर , गाजियाबाद , आनंदविहार  सुबह जल्दी व् शाम तक देर तक चलाया जा सकता है।

ऐसा करने से जहां यात्रियों की यात्रा सुगम होगी ,वहीं रोडवेज की आय पर भी विपरीत प्रभाव नहीं पडेगा। .

 

 

जय हिन्द ! जय भारत !

 


6.10.26

रिवर्स पलायन -एक एडवेंचर

 

  एक आम आदमी  रिटायरमेंट की बाकी बची  जिंदगी शहर की भाग दौड़ से दूर अपने  पैतृक गावं में जब गुजरता है तो यह एक तरह का रिवर्स पलायन है ,ठीक  वैसे ही जैसे सैल्मन अपने अंतिम समय में  करती है।   

  आज ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अपनी  बाकी बची जीवन  थोड़ी सी पुस्तैनी जमीन पर रहकर गुजारना पसंद करते है। उन्हें  यह   वृद्ध अवस्था में  ओल्ड होम  ऐज  में रहने से बढ़िया  ऑप्शन लगता है।

 ऐसा करने में कुछ लोगों को कई दिक्क़तों का सामना करना पड़ता है,  जैसे भाई-बंधुओं द्वारा उनके पुस्तैनी मकान, जमीन आदि पर कब्जा करना, पुस्तैनी मकान, जमीन पर कब्जा लेते समय संघर्ष करना , महानगरों की सुविधा की कमी खलना, लम्बे समय से बाहर रहने के कारण गांव की बदली जियोग्राफी को समझने में परेशानी आदि आदि , रिवर्स पलायन घर परिवार के लोगों का सहयोग न करना  आदि- आदि। 

परन्तु जहां समस्या है, वहां समाधान भी है। जहां चाह,  वहां राह। अंत में हल निकल  आता है। ऐसे में स्थानीय प्रशाशन  ऐसे  लोगों की मदद कर सकता है। 

 रिवर्स पलायन से राज्य में कैपिटल आती है, जो  मकान आदि में लगती है , इससे राज्य की आय व्  रोजगार के अवसर पैदा होते है।

रिवर्स पलायन एक तरह से  नयी व् पुरानी  पीढ़ी को जोड़ता है। जो समाज व्  देश   में हितकर है ।

रिवर्स  पलायन वाले लोग गांव आकर समय का सदुउपयोग से पुस्तैनी खेती करते है ,सामाजिक कार्य करते है। 

शायद यही कारण है ,  रिवर्ष पलायन वाले  लोगों को ओल्ड होम जैसे सेलटरों की जरूरत ही नहीं पड़ती , और बाकी जिंदगी  तनाव रहित   गुजारते है।  

साथ ही शहर में रहने वाले परिवार के नौकरी पेशा  सदस्य जो  CA , वकील  या अन्य पेशा में हो सकते है, के लिए यहां आना एक फ्री का  पिकनिक स्पॉट हो जाता है।  जो    उन्हें पूर्वजों की  धरोहर से जोड़ने का काम करता है। 

निश्चित ही    जीवन के  चौथे चरण का  रिवर्स पलायन जो परिवारों को पूर्वजों की  जड़ों से जोड़ता है , जो  समाज व् देश में महत्वपूर्ण  योगदान देता है  । 

रिवर्स पलायन जीवन के अंतिम चरण का एक एडवेंचर है, जिसे सकारत्मक रूप में लेना चाहिए । यह भी ध्यान देने योग्य है कि रिवर्स  पलायन उत्तराखंड और बिहार अधिक होता है।  

जय हिन्द ! जय भारत ! वन्दे भारत !

 


दिल्ली में Nov.26 से Non-BS-6 वाहन प्रतिबंधित !

दिल्ली   सरकार द्वारा   प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए   1 Nov.26 से दिल्ली में अन्य राज्यों में पंजीकृत ( CNG / इलेक्ट्रिक वाह...