28.12.12

टयूनीशिया-इजिप्ट जैसे जन आन्दोलन क्यों ?


टयूनीशिया- इजिप्ट ( मिश्र ) देशों में वर्ष 2011 में जन आन्दोलन ने दशकों से सत्ता से चिपके तानाशाहों को उखाड़ फैका / जहां टयूनीशिया के राष्ट्रपति जैन अल आबिदिन बिन अली ( "अली ") ने 1987 से 2010 तक लगभग 23 वर्ष देश पर शासन किया वहीं इजिप्ट ( मिश्र ) के राष्ट्रपति होश्नी मुबारक ( " मुबारक ") ने 1981 से 2010 तक लगभग 30 वर्ष शासन किया / लम्बे शासन में दोनों देशों की जनता लगभग एक ही तरह की समस्या से जूझ रही थीं जैसे -
1 - भयंकर बेरोजगारी
2-- रोजमर्रा खाने पीने की चीजों में भारी मूल्य वृद्धि
3-- फैला व्यापक भ्रस्टाचार
4-- बोलने की आजादी पर रोक
5-- राजनैतिक स्वतंत्रता की रोक
6-- निम्न जीवन स्तर
     इंडिया में उपरोक्त में 4 व् 5 को छोड़ जाए, ( 4 नंबर कारण - "बोलने की आजादी "  पर भी आंशिक रूप से   I.T.Act. Section 66 A के माध्यम से रोक लगाने की कोशिश हो रही है ) निम्न को भी शामिल किया जा सकता हें-
1- क़ानून व्यवस्था
2- केंद्र की सत्ता में जन -प्रतिनिधि का जनता के बीच संवादहीनता व् अनुपस्तिथि
3- लोगों की घटती क्रय शक्ति
4- सरकारों का सामाजिक जिम्मेदारी से पल्ला झाडना ( जेसे तेल के दाम, गैस सिलेंडर , बिजली , पानी, किराया , सड़क टोल , स्कूल का खर्च , दवाई का खर्च , आदि के दामों में बेतहाशा वृद्धि )
5- टेक्सों में वृद्धि
6- सरकार को एक कॉरपोरेट सेकटर के तरह से चलाने की कोशिश
इन्ही सब कारणों से लोग सरकार से नाराज हें / इस लिए जब भी कोई दिल हिलाने वाली वारदात होती हें जैसी कि दिल्ली में सामूहिक रेप काण्ड की घटना तो लोग ,नेता व् सरकार पर भरोसा न कर ,स्वयं ही जन -आन्दोलन में उतर आन्दोलन में उतर पड़े  / इसकी सीख शायद जनता ने अरब देशों के टयूनीशिया- इजिप्ट के जन आन्दोलनों से ली हें /
अगस्त 2011 में अन्ना को  तिहाड़ में बंद कर सरकार के रणनीति कारों ने एक विशाल जन -आन्दोलन को खडा कर दिया / भारत एक विशाल लोकतंत्र हें जहां पर गावं पंचायत / नगर निगम
से लेकर राज्य व् केंद्र के स्तर तक जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हें / पर  जन- आन्दोलन को देख कर लगता हें जेसे देश की जनता तानशाही / राजशाही के खिलाफ आन्दोलन कर रही हो /  कारण -देश में प्रधानमंत्री पद पर अटल जी , इंदिराजी , राजीवजी , नरसिम्हाराव  जैसे जनाधार नेता का न होना भी हो सकता हें / लोगों को समस्या के हल के लिए कभी प्रधानमंत्री जी ,कभी राहुल जी, कभी सोनिया जी की और आस भरी नजरों से देखना पड़ता हें जेसे कि गैस सिलेंडर के केस में या अन्य अनेकों मौकों पर / समय पर निर्णय लेने में देरी हो जाती हें जो जनता की एक नाराजगी का कारण बन रही हें / उपरोक्त नेता रोज टी वी / जनसभा के द्वारा लोगों में मोजूद रहते थे / आज देश में ऐसे ही नेताओं की जरूरत हें जो जनता के बीच अपनी उपस्तिथि बनाये रखे / उनकी भाषा में बात करे / तभी देश में लोकतंत्र होते हुए भी टयूनीशिया- इजिप्ट जेसे जन आंदोलनों को रोका जा सकता हें /


20.9.12

दिल्ली में बिजली की दरों में अतार्किक वृद्धि


एक ओर  जहां  दिल्ली में लोगों का अपार्टमेंट्स , डी डी ऐ फ्लेट्स ,मल्टी स्टोरीज बिल्डिंग व कम कुदरती रौशनी वाले घरों में रहने के कारण बिजली की खपत बढ़ी हें, वहीं बिजली के नए तेज भागने वाले डिजिटल मीटर व जलबोर्ड द्वारा पानी की कम व बिना प्रेशर वाली वाटर सप्लाई के कारण भी बिजली की खपत में बढ़ोतरी हुई हें/ जल बोर्ड का पर्याप्त मात्रा में व समय पर पानी न मिलने के कारण लोगों को भू जल के स्रोत पर जहां निर्भर होना पड़ रहा हें वहीं जल बोर्ड के पानी के लिए भी बिजली की मोटर का बार बार इस्तेमाल करना पड़ता हें इसमें भी काफी बिजली तो खाली मोटर बार बार चलाने में खर्च हो जाती हें /     इस प्रकार पांच छः घर के सदस्य के घर में गर्मी में जिसमें एक कूलर , फ्रीज , दो पंखे , एक वासिंग मशीन , एक प्रेस व पांच छः CFL TUBE  हो तो आज के तेज भागते मीटर में लगभग प्रतिदिन आठ यूनिट का खर्चा आ रहा हें / जब कि पहले मीटर में यही लगभग चार से पांच यूनिट के बीच आता था /दिल्ली सरकार /बिजली कम्पनी ने एक आम घर की खपत को 200 यूनिट प्रति माह तय किया हें तथा जिस पर कम दर से बिजली दी जाती हें जो आज के हालत व उपरोक्त परिस्तिथी को ध्यान में रखा जाए तो एक दम बेमानी हें / यदि उपरोक्त बातों को देखें तो इस समय एक आम घर में गर्मी के दिनों में कम से कम 250 यूनिट का खर्च आता हें /   सुझाव - बिजली की रियायती दर के स्लेब को बढाकर कम से कम 250 यूनिट किया जाए /बिजली की अतार्किक दरें –  1st   जुलाई 2012 से बिजली की दरें अतार्किक तरीके से बढाई / रखी गयी हें जो निम्न हें  From 0 to  ( Up to) 200 Units   @ 3.70   Paisa (  Ist Category )+ Fixed Charges =  Amounts  +13 % ( 8%+5%  ) =  Per Units rate
 From 0 to ( up to) 400 Units @4.80 Paisa ( दूसरी श्रेणी ))+ Fixed charges = Amounts +13 % (8%+ 5% ) = Per Units rates
इसका अर्थ ये हुआ कि किसी उपभोगता की खपत यदि  201  यूनिट हुई तो उसे बिजली का भुगतान 4.80 + taxes   per Units  की दर से करना पड़ रहा हें / जब कि इससे पहले ये नहीं था बिजली की दर स्लेब की दर से लगती थी अर्थात 0 to 200 @ 3.70  + taxes  पेसे व बाकी 1 UNIT पर 4.80 + taxes  /
दिल्ली में नब्बे पतिशत उपभोगता दुसरी श्रेणी वाली हें / इस प्रकार बिजली कम्पनी ने DERC  से बड़ी ही चालाकी से बिजली की दरों में जबरदस्त इजाफा करा दिया /जिसकी सीधी मार आम उपभोगता जिसमें सभी वर्ग शामिल हें पडी हें /
दिल्ली सरकार ने बिजली का निजीकरण करते समय ये भरोसा दिलाया था कि इससे बिजली की दरें कम होगी व बिजली की व्यवस्था में सुधार होगा /व्यवस्था में सुधार से तो इनकार नहीं किया जा सकता पर बिजली की दरें घटने की बजाय मनमाने तरीके से व अतार्किक तरीके से बढ़ायी जा रहीं हें जिसका उदाहरण जुलाई 2012में बड़ी दरें हेंDERC व दिल्ली सरकार से अनुरोध हें कि वह इस अतार्किक दरों को सही करे व उसे INCOME TAX  SLAB की तरह लागू करे व साथ ही साथ कम दरों पर बिजली के खपत जो अब 200 UNITS  उसे बढाकर 250 तक करे /बिजली कंपनी का रवैयाये भी पाया गया हें कि बिजली कम्पनी एक वर्ष में केवल लोड को घटाने में भी मनमाना रवैया कर रहीं हें यदि कोई उपभोगता अपना वर्तमान लोड घटाना चाहता हें तो केवल एक वर्ष में एक किलो वाट का ही लोड घटाया जा रहा हें / जो एक अनुचित व्यवहार की श्रेणी में आता हें /दिल्ली में 1 जुलाई 2012 से बढ़ी बिजली दरों का  SLAB  अतार्किक हें इसी कारण बिजली के बिलों में जबरदस्त इजाफा हुआ हें /जिसे  देख कर ज़ोर का झटका धीरे से लगा / बिजली की दरें बड़ी ही चतुराई से रखी गयी हें

16.9.12

गैस के छः सिलेंडर का कोटा

 
डीजल के दाम , रिटेल सेक्टर में ऍफ़ डी आई जेसे मुद्दे पर आम गृहणी शायद इतने गुस्से में न हो ,जितने वह रसोई गैस के छः सिलेंडर करने पर / आज हर गृहणी सरकार को कोस रही हें / दिल्ली में वेसे भी पच्चीस दिन में गैस के सिलेंडर की बुकिंग की जाती हें तो दिल्ली का आम आदमी तो अभी भी साल भर में बारह सिलेंडर से काम चला रहा हें /पर अब साल भर में गैस के छः सिलेंडर का कोटा निर्धारित करने के कारण आम आदमी सदमें में हें / किसी घर में यदि दो बच्चे व मियां बीवी हें, साथ में माता पिता हें तो बड़ी मुश्किल से एक सिलेंडर एक महीना चलता हें / घर में सप्लाई होने वाले सिलेंडर में गैस वेसे भी एक आध किलो कम आती हें / ऐसे में सरकार का छः सिलेंडर का फरमान महगाई की मार झेल रही गृहणी के लिए कटे पर नमक छिड़कने जैसा है /
सरकार को इस फैसले पर पुर्नविचार करना चाहिए तथा सिलेंडर की संख्या वर्ष भर में कम से कम बारह करने चाहिए / इससे आम आदमी जिसमें दलित , मुस्लिम , सिख , पिछड़े सभी शामिल हें को लाभ होगा / देश में सरकार के प्रति गुस्सा कम होगा व सरकार की छवि प्यूपिल फ्रेंडली बनेगी /
सरकार को देश की इकोनोमी के साथ साथ आम आदमी के घर की इकोनोमी व क्रय शक्ति के बारे में भी सोचना चाहिए कहीं ऐसे न हो बढती महंगाई में उस आम आदमी की इकोनोमी ही न ढह जाए जिसके लिए देश की इकोनोमी बनाई जाती हें /
 
 
 
 

24.8.12

पलायन


संसार में  कई कारणों से प्राणी पलायन करते हें / पशु पक्षी भोजन की खोज में पलायन करते हें तो कभी मौसम की मार से बचने की लिए एक स्थान से दूसरे स्थान को  पलायन को  बाध्य होते हें / मनुष्य जाति भी पलायन से अछूती नहीं / कभी रोजगार की तलाश में प्रतिभा का पलायन, कभी शिक्षा, कभी चिकित्सा के कारण पलायन / कभी आधुनिक  सुख - सुविधा के लिए गावं से शहर में पलायन / सामजिक शास्त्र में पलायन के कारणों को विस्तार से पढ़ा जा सकता हें / समय, देश काल    के साथ पलायन के कारण भी  बदल जाते हें /  आज भारत के साथ साथ  अन्य देशो में पलायन के अन्य  कारणों में   मुख्य कारण असुरक्षा   के कारण  पलायन शामिल हें /  भारत   के कुछ  राज्यों  व  गावों से  लोगों का पलायन  रोजगार के अवसर पुस्तेनी धंधे से जुडा होने के कारण भी  सुरक्षा के अभाव में हो रहा हें /  जम्मू कश्मीर से कश्मीरी पंडितों का पलायन इसी श्रेणी में रखा जा सकता हें /
 अन्य देशो जेसे पाकिस्तान  से हिन्दुओं का पलायन भी  नागरिकों को उचित सुरक्षा न  देने के कारण  हें /  बांग्ला देश से चोरी छुपे  भारत में पलायन वहां  रोजगार के कम अवसर व असुरक्षा से जुडा हें /  भारत में केंद्र सरकार व राज्य सरकार को  अन्य बातो के अलावा नागरिकों की सुरक्षा की ओर विशेष धयान देना  चाहिए / ताकि देश में बेवजह का पलायन समस्या न  खडी  करे /   सुरक्षा कारणों से  गाँव से शहरों की तरफ पलायन से  देश की एकता- अखंडता के  साथ साथ   रोजगार   व वहां  उपलब्ध सीमित  संसाधनों पर  भी विपरीत प्रभाव पड़ता हे /

16.7.12

दिल्ली से मुज़फ्फरनगर तक रेल शटल सेवा का विस्तार


कांवड़ की धार्मिक यात्रा के कारण दिल्ली से मोहन नगर- गाजियाबाद - मोदी नगर - मेरठ , मुजफ्फरनगर तक का सड़क मार्ग बुरी तरह से प्रभावित हें / इस कारण उद्योग धंधे के साथ साथ नोकरी व अन्य कामों के लिए इधर उधर जाने वाले लोगो का जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हें / पर प्रशासन इस ओर आँखे मूंदें बैठा हें /
दिल्ली से गाजियाबाद - मुराद नगर - मोदी नगर - मेरठ - दोराला - खतौली - मंसूरपुर -मुज़फ्फरनगर तक रेल का एक अच्छा नेटवर्क मौजूद हें / यदि इस रेल मार्ग पर अलीगढ , शामली , पानीपत , फरीदाबाद , पानीपत की तरह रेल की शटल सर्विश शुरू की जाए तो राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर सार्वजनिक यातायात का भारी दबाव कम करने में मदद मिलेगी /
यदि रेल शटल जो दिल्ली - गाजियाबाद - फरीदाबाद तक चलती हें को मेरठ - मुज़फ्फरनगर तक विस्तार दे दिया जाए तो जहां दैनिक यात्री लाभान्वित होंगे वहीं रेल को भी बिना नयी गाडी चलाये , स्टाफ बढाए आय को बढाने का बिना कुछ खर्च किये एक सुनहरा मौक़ा मिलेगा /
ये सूझ बूझ तत्कालीन रेल मंत्री श्री लालू यादव जी ने वर्ष २००६ में दिखाई थी जिन्होंने मुज़फ्फरनगर व मुजफ्फरपुर में कोई अंतर किये बिना दिल्ली से मेरठ की रेल शटल को मुज़फ्फरनगर तक विस्तार कर चलाने की स्वीकृति दी थी जिसका आज लाखों लोग लाभ उठा रहें हें तथा रेल की आय भी हो रही हें / इस शटल को 19 जुलाई 2012 से मुजफ्फरनगर से बढ़ाकर सहारनपुर तक कर दिया गया हें / इस तरह से अब इस दिनाक से मुज़फ्फरनगर से कोई शटल परिचालन में नहीं होगी जिस कारण दैनिक यात्री को भारी समस्या का सामना करना होगा /
रेल प्रशासन से इस पोस्ट के माध्यम से अनुरोध हें कि वो यात्रियों की भारी संख्या को ध्यान में रख दिल्ली - गाजियाबाद- फरीदाबाद की शटल को मुज़फ्फरनगर तक विस्तार दे इससे नया गाजियाबाद - मुराद नगर - मोदी नगर - मौहिद्दीन पुर , परतापुर -मेरठ सिटी व केंट - दौराला- सकौती - खतौली - मंसूरपुर से यात्रा करने वाले हजारों दैनिक यात्रियों जिसमें छात्र , नोकरी पेशा वाले लोग व बहुतायत में शामिल हें को लाभ मिलेगा /
रेल प्रशासन इस मार्ग पर परिचालन लागत को गाडी को चलाने से पहले आंकता हें / यदि वह ट्रायल बेसिश पर गाडी को चलाए तो उसे यात्री की संख्या का अनुमान व अपनी आय का आशानी से चल जाएगा / क्या रेल प्रशासन इस ओर ध्यान देगा ?

14.10.10

मुज़फरनगर की रेल / यातायात समस्याएं

मुज़फरनगर की रेल / यातायात समस्याएं


  मै मुज़फरनगर  की रेल यातायात  से संबधित समस्याओं को उठाना चाहता हूँ .  हो सकता है इसके    माध्यम से रेल   यात्री को होने वाली परेशानी को सम्बंधित प्रशासन तक पहुचाने  मे मदद मिले .  आगामी बजट के समय कुछ यहाँ के लिए भी किया जाए .  मुज़फरनगर   बाई पास बनने से उतराखंड की लगभग सभी  व यू पी की  अधिकतर बसे शहर के बाहर से निकलती है . जिस कारण  यहाँ मजबूरन लोगों को रेल का रुख करना पड़ा . यहाँ  रेल का इसी कारण  महत्त्व  काफी बढ़ गया है .  तथा  अब रेल  ही  एक सस्ता व सुलभ साधन उपलब्ध  है . इसमें कोई शक भी नहीं रेल किराया सस्ता होने से  भी भीड़ रेल मे बढ़ी है . रेल का  मुज़फरनगर के लिए  रोजगार , शिक्षा , चिकित्सा व आने जाने में काफी बड़ा  अहम् रोल  है .
वैसे तो यहाँ से काफी मेल गाडी उत्तराखंड / सहारनपुर की ओर गुजरती है परन्तु 1996  से दिन के समय  रिजर्व कोच मे यात्रा पर अनारक्षित यात्री को भारी जुरमाना देना पड़ता है . व साथ ही  जर्नल डिब्बे नाम मात्र के है ,  इसलिए यहाँ को लोगो को इन गाड़ियों का जो लाभ मिलना चहिये था नहीं मिल पा रहा . उलटे इन गाड़ियों ने पेसेंजर गाड़ी की रफ़्तार पर ब्रेक लगा दिए . इस बारे मे  जुलाई  २००५ मे उस समय के रेल मंत्री जी श्री लालू जी  को   पत्र लिखा . जिन्होंने   मेरठ शटल को  मुज़फरनगर तक विस्तार दे दिया . निश्चित ही यह  उनका व रेल  प्रशाशन  का एक सराहनीय  कदम  था
1 -  वर्ष  २००६    मुज़फरनगर  से  केवल  दिल्ली के लिए एक ही ट्रेन शटल ( 1DM ) का संचालन किया जा रहा है . यात्रियों की संख्या व  क्षेत्र   के विकास  को देखते हुए यहाँ से और शटल/ एक्सप्रेस   ट्रेनों  को ना केवल दिल्ली बल्कि मेरठ / सहारनपुर/ रूडकी /  हरिद्वार  तक चलाया जाना  चाहिए  . इससे लम्बी दूरी की ट्रेनों मे  लोकल यात्री का दबाव कम होगा .  लोकल यात्री के  साथ साथ लम्बी दूरी के यात्री भी आराम से यात्रा कर सकेगे .रेल आरक्षण की मारा मारी भी कम होगी .
२- मेरठ सिटी से टपरी ( सहारनपुर ) तक रेलवे लाइन को दोहरा करने का काम तेजी से किया जाना  चाहिए  . सिंगल लाइन होने से पेसेंजर  ट्रेन को,  सामने से आने  वाली ट्रेन को पास देने मे बीच के स्टेशनो पर  काफी समय  तक खड़ा होना पड़ता है जिससे  यात्रियों  का काफी समय बर्बाद  होता ह़े  , रेल संचालन  मे देरी होती है . रेल स्टाफ पर मानसिक  दबाव पड़ता है .  उनकी   कार्य      करने की शक्ति पर बुरा  प्रभाव   पड़ता है , यात्री की सुरक्षा व समय  भी दाव पर लगी रहता  है .
सिंगल लाइन पर अधिक ट्रेन संचालन से रेल ट्रेफिक मे कभी भी बाधा पड़ सकती है .
३- रेल लाइन का सहारनपुर से मेरठ - गाज़िया बाद तक बिजलीकरण का काम तेजी से किया जाना चाहिए .  ताकि EMU / DMU   चला कर  लोकल यात्रियों का दबाव कम किया जा सके .
४- टिकिट खिड़की पर भीड़ कम करने के लिए दुबारा से UTS ( अनारक्षित टिकटिंग पर्णाली ) को बहाल किया जाना चाहिए .
 इसमें  किसी दुरूपयोग के कारण संसोधन करने से यात्रा से ३ दिन पहले टिकेट लेने का प्रावधान  बदल दिया गया . जो अब  बदल कर २०० किलोमीटर से कम  टिकिट  लेने पर समाप्त कर दिया गया है .  इससे टिकिट खिड़की / रेलवे स्टेशन पर घंटों पहले टिकिट लेने के चक्कर में  भीड़ जमा हो जाती है .  प्लेट फार्म पर / करंट टिकिट खिड़की पर  यात्रियों का दबाव कम करने के लिए पुरानी व्यवस्था का  पुनः बहाल किया जाना जरुरी है . अनारक्षित  टिकिट को  साथ ही  बेंक ,पोस्ट ऑफिस मे भी  मिलने  की  व्यवस्था करनी चाहिए .  

५- मुज़फरनगर शहर  रेलवे स्टेशन के दोनों और  घनी आबादी बसी  होने के कारण व यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुअ
 दिल्ली की तरह दोनों  ओर  टिकिट  खिड़की/ रेल टिकिट प्राप्त करने की व्यवस्था  होनी चाहिए . ताकि स्टेशन की भीड़ को   दोनों ओर बाँट कर काम किया जा सके .  भीड़ को नियंत्रित किया जा सके . नई मंडी/ पटेल नगर/ भोपा रोड / गाँधी कालोनी  आदि   की  ओर   के लोगो को  इस  समय  टिकिट  लेने मे समय व भारी कठिनाई का सामना  करना  पड़ रहा है .
6- देवबंद से  इकबालपुर ( रूडकी )तक के रेल मार्ग को जल्दी पूरा करना चाहिए . ताकि उत्तराखंड से आने जाने वाली गाड़ी को घूम कर न जाना पड़े व दिल्ली  से उत्तराखंड की राजधानी  देहरादून     पहुचने के समय को काम  किया जा सके .
7 मुज़फरनगर ,हरिद्वार - रूडकी  -मेरठ  के लोग एक स्थान से दुसरे स्थान पर काफी आते जाते हैं  . लोगो की सुविधा व मेल गाड़ी पर लोकल यात्री व भीड़ कम करने के लिए इन   आस्थानों   को जोड़ने के लिए  शटल चलाई जानी चाहिए .
8- टिकट खिड़की से भीड़ कम करने के लिए २४ घंटे टिकट एजेंसी व करंट काउंटर बढाए जाने चाहिए .  तथा टिकट एजेंसी  की संख्या बढ़ा कर भीड़ को जहाँ कम किया जा सकता है वहीँ  लोगो को रोजगार भी प्रदान किया जा सकता है .
९- यहाँ के लोगो के मन मे यह बात घर कर गयी है कि रेल यहाँ के लोगो को सोतेली आँखों से देखते है . अतः  मुज़फरनगर  ( पशचमी उत्तरप्रदेश ) व मुज़फरपुर ( बिहार ) मे रेल विकास के मामले मे अंतर न किया जाये .
10- फिलहाल महिलाए प्रायः  यहाँ के साथ साथ लगभग सभी अस्थनों पर  बिना लाइन के टिकट लेती है . इससे  पुरुस  यात्री लाइन मे ही खड़े रह जाते है . अतः महिला टिकट खिड़की अलग से होनी चाहिए . ताकि टिकिट  वितरण मे मारामारी न मचे .  
११-- उत्तराखंड राज्य का टूरिस्म  मे काफी कुछ निर्भर करता है . तथा यह एक यात्री यों के लिए सबसे इनकम वाला रुट है .  इसलिए इस रुट का विकास करना बहुत जरुरी है .
१२- रूडकी - हरिद्वार रेल रुट का  जल्दी सर्वे कर उस पर कम शुरू किया जाना चाहिए . ताकि  रेल ट्रेफिक को लक्सर ( जक्सन) पर कम कर रेल की रफ़्तार को बढ़ाया जा सके .
१३- मुज़फरनगर से शामली - पानीपत तक रेल का नया रुट निकाल कर  हरिद्वार के रुट को मिलाना चाहिए .

आशा है हमारा रेल विभाग इस विषय मे अवस्य आवश्यक कदम उठाएगा . इससे रेल की जहाँ आय बढ़ेगी . लोगो को यातायात की सुविधा होगी . रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे . उत्तराखंड राज्य का टूरिस्म बढेगा .

ढंडेरा नगर पंचायत (रूड़की)-में जल निकासी की समस्या

देश के अन्य राज्यों के अतिरिक्त , योगी   जी के उत्तरप्रदेश,धामी जी उत्तराखंड   में भी केंद्र सरकार द्वारा  अनेकों   योजना     की   लागू कर ...